Honest word

i don't fear the truth

काश वो दिन वापिस आ जाए

on August 11, 2013

जाने कहॉ गये वो दि

वो दिन लौट के ना  आऐगे

जब हम साथ मिल कर बैठा करते थे,

गुनगुनाया करते थे

अपने मीठे सपने सजाया करते थे

माँ बाप की डार्ट खाते

एक दुसरे की कंधें पर रोया करते

मास्टर जी से पिटाई पढ़ती

मनु दीदी से लड़ाई करती

नन्हे नन्हे पैरो से साइकिल की

पैंडल मारते

हम तुम आपस में मस्ती करते

काश वोह दिन लौट के वापिस आ जाए

ज़िन्दगी जीने के पल वापिस आ जाए!

हम तुम आपस में लड़ते झाड़ते पर तीसरे को आपने बीच आने न देते

जब में दुखी होती तोह मुझे मनाती हो

जब खुश होती हु तोह सताती हो

जैसे जिंदगी में दिन रात हुआ करते है,

वैसे ही तुम हम एक दुसरे के लिए खास हुआ करते है.

वोह एक दुसरे के साथ हँसना – रोना

चिड़ाना – मानना अपनी दोस्ती का हसीन पल था

जब हम एक साथ खुश थे

काश वोह दिन लौट के वापिस आ जाए

जिंदगी जीने का पल फिर से आ जाए

काश वोह दिन लौट के वापिस आ जाए

वोह दिन जब हम छोटे थे

खुश थे

काश वो दिन वापिस आ जाए

ज़िन्दगी जीने के पल वापिस आ जाए

 

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13 responses to “काश वो दिन वापिस आ जाए

  1. 09chakori says:

    amazing……keep up with the gud work……proud……

  2. vandada says:

    awesome

  3. sampada1blog says:

    keep up the good work..you talented mojo,,,,:-)

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